Monday, 6 June 2016

ननद-भाभी का प्यारा रिश्ता



ननद-भाभी का प्यारा रिश्ता





बचपन की लाडली ननदिया बड़ी होकर भाभी पर हावी हो जाती है और भाभी भी अपने अधिकारों की खातिर अपनी अकड़ दिखाती है, सच है न ... यही कहानी होती है न हमारे घरों में ननद-भाभी की नोक-झोंक की। उनकी मीठी नोक-झोंक कब अड़बाजी व तकरार में बदल जाती है, पता ही नहीं चलता।

क्या हमने कभी सोचा है, ननद-भाभी के इन विवादों के पीछे क्या कारण है? यदि आप कारण टटोलेंगे तो आपको जवाब मिलेगा 'मैं का भाव'। यह भाव जब तक आपमें रहेगा तब तक आप किसी के भी साथ अपने रिश्तों की गाड़ी को लंबी दूरी तक नहीं चला पाएँगे।

यह एक सार्वभौमिक सत्य है कि हमें कभी न कभी अधिकारों का हस्तांतरण करना ही पड़ता है। हम हमेशा मालिक बनकर बैठे रहेंगे तो हम कभी किसी का प्यार विश्वास हासिल नहीं कर पाएँगे। हमारी थोड़ी-सी विनम्रता व अधिकारों का विभाजन हमारे रिश्तों को मधुर बना सकता है।

ननद और भाभी के झगड़ों की कई सामान्य वजहें होती हैं जैसे शादी से पहले तो घर की हर चीज पर ननद का अधिकार होता है परंतु शादी के बाद हालात बदल जाते हैं। अब ननद घर की मेहमान बन जाती है और भाभी घर की मालकिन। ऐसे में हर छोटी-बड़ी बात पर ननद का हस्तक्षेप घर की बहू से बर्दाश्त नहीं होता। बस यहीं से शुरुआत होती है इस रिश्ते में कड़वाहट की।

कहते हैं ताली दोनों हाथों से बजती है। हमेशा ननद की ही गलतियाँ हों, ऐसा नहीं है। कभी-कभार भाभी का अपने मायके वालों के प्रति अभिमान व घर के हर छोटे-बड़े फैसलों में अपने सास-ससुर की उपेक्षा ननद के भाभी पर क्रोध का कारण बनती है।

रिश्तों को जोड़ने से पूर्व हमें उसके दूरगामी परिणामों के बारे में सोचना चाहिए क्योंकि हमें इनकी राह पर लंबी दूरी तक चलना होता है। जीवनभर आपके माँ-बाप आपके साथ रहेंगे यह संभव नहीं है, अत: इस बात को ध्यान में रखकर यदि परिवार के सभी सदस्यों से मृदु व्यवहार कायम किया जाए तो यह रिश्ता नोक-झोंक के बजाय हँसी-ठिठौली का रिश्ता बन सकता है।

रिश्ते बनाकर तोड़ने की चीज नहीं होते हैं। यह तो ताउम्र निभाने के लिए होते हैं। जब जीवनभर इन रिश्तों को निभाना है तो क्यों न प्यार के अमृत से बैर का जहर दूर किया जाए और ननद-भाभी के रिश्ते को दो बहनों का रिश्ता बनाया जाए।

Tuesday, 19 January 2016


पढ़ाई और परीक्षा के टिप्स :
  • अगर आपको Exam में अच्छे Marks लाने हैं तो आपको पढ़ाई के लिए एक Routine  बनना होगा और उसे Strictly Follow करना होगा.
  • और आपको ये Routine, Exam के समय नहीं बनाना चाहिए. बल्कि पहले हीं बना लेना चाहिए और उसे फॉलो करना चाहिए.
  • और अगर आप Class पहले या दूसरे स्थान पर आते हैं तो अपने Percentage बढ़ाने के लिए आपको गहन अध्ययन की जरुरत होगी.
  • आपको अच्छे Writers की किताबें पढ़नी चाहिए. जिसमें विश्वसनीय तथ्य दिए हुए हों.
  • आपको अपना एक अच्छा सा Notes तैयार करना चाहिए. ताकि Exam के समय आप महत्वपूर्ण तथ्यों को आसानी से एक नजर में देख सकें. पूरी किताब पलटने की जरुरत न पड़े.
  • आपने जो भी पढ़ा है उसे बार-बार लिख कर दोहराते रहें.
  • हर दिन पढ़ने के अलावा मनोरंजन के लिए भी पर्याप्त समय दें.
  • याद रखें जितनी भी देर पढ़ें एकाग्रता से पढ़ें. क्योंकि एकाग्रता के बिना ज्यादा सफलता नहीं पाई जा सकती है.
  • परीक्षा के नाम से न डरें. परीक्षा
  • पर्याप्त नींद लें. पर्याप्त नींद लिए बिना आप कोई भी काम अच्छे से नहीं कर सकते हैं. खास तौर पर पढ़ाई के लिए अच्छी नींद बहुत जरूरी है.
  • Exam Hall में हमेशा समय से पहले पहुंचें. ताकि आप समय से परीक्षा लिखना शुरू कर सकें.
  • परीक्षा में पहले उन प्रश्नों को बनाएँ जिन्हें आप अच्छे से जानते हैं. Hard Questions को बाद में बनाएँ.
  • परीक्षा से पहले ऐसी Gossip न करें, जिससे आपको अनावश्यक रूप से तनाव हो जाए.
  • क्योंकि आप विधार्थी हैं इसलिए आपको विद्यार्थी की तरह हीं संयमित जीवन व्यतीत करना चाहिए. तभी आप एक सफल विधार्थी बन सकते हैं और जीवन में सफलता पा सकते हैं.
  • और याद रखें आज की तारीख में खुद को हर दिन Update करते रहना बहुत हीं ज्यादा जरूरी है.